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देवियों का चरित्र लगती है, मंदिरों सी पवित्र लगती है,, रूह महकी है हर्फ महके हैं, वह ग़ज़ल प्रेम इत्र लगती है,, कल्पना से भी है अनूठा सच, बात कितनी विचित्र ...